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ड्रग्स और भविष्य

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आज कुछ दिनों बाद फिर कुछ लिखने की इच्छा हुई तो फिर से आप सब के समक्ष कुछ विचार प्रस्तुत करना चाहता हु, जो की आज कल युवाओ में एक दूषण बन चूका हे और पूर्ण सत्य जानने के बाद भी युवा उसका सेवन करते हे। ...  में बात कर रहा हु समाज के सबसे बड़े विरोधी और स्वस्थ हानिकारक पदार्थ ड्रग के बारे में  वर्तमान में जाने माने अभिनेता शाहरुख़ खान के पुत्र आर्यन खान की ड्रग्स के मामले में गिरफ्तारी होने के बाद फिर से यह विषय सुर्खियों में हे, परन्तु हम सब जानते हे की यह कोई आज कल की समस्या न होते हुए वर्षों से चली आ रही गंभीर समस्या हे... यह कोई नयी बात नहीं हे की युवा इन हानिकारक पदार्थो का सेवन करते हे, और पिछले कुछ वर्षो में इसका प्रमाण जानकारी के उपरान्त भी बढ़ता गया हे और आज यह समाज के स्थानिक इलाको में आसानी से प्राप्त हो रहा हे. इस विषय में बहोत बार चर्चाए हुई, कुछ दिन इसके विरोध में अभियान चले पर फिर वापस इस विषय पे पर्दा दाल दिया जाता हे और कोई बड़ी हस्ती के पास पाए जाने पे यह विषय वापस चर्चा में आ जाता हे, पर ऐसा क्यों की जब कोई हस्ती के पास हो तभी उस की चर्चा हो? , क्या समाज के सामा...

मंजिल

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दर्द सा दबा था दिल मे, कुछ ना लग रहा था अच्छा जगमे... बन गयी थी वीरान ज़िन्दगी, कर के अपने सफलता की बन्दगी... समज न आया किस तरह उसे समज़ाऊ, कैसे इस से बाहर लाऊ... आखिर एक उपाय आजमाया, उसे जोश सा एक गीत सुनाया, एक लौ बनायी जलती आग सी, जिसने बना ली उसने जीने की आस सी.... कहा उसे अपना एक सपना बना, उसके साथ जीने को अपना बना, बना वो हुनर खुद मे, की अपने सपने का तू ही रास्ता बना... रख वो अंदाज़ जीने का, अपने इस चौडे सिने का, दूर दिखे मंज़िल जो तुझे, उसे खिंच के लाना हे तुज़े ... कर्तव्य पथ से बना वो इतिहास, हर कोई करे बस ऐसी आस, बन जाऊ मे भी वो दिल की हौंश, जिसमे था मंजिल खिंच लाने का जोश...

Do Bharat really has become equal for everyone??

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Lets directly come to the point this time as i feel this topic doesn't need any precap or defination. we know from our birth that the topic of equalism is being raised by Many social activists of the Bharat. which has been reduced as well in broader way but than to today if i ask you all that, Do you Really feel that Bharat has become Equal for everyone?? if you ask me than my answer will be not yet, it has a long to go... now all will ask how?? as todays generation is now coming out of the castism, feminism & other poor rich thinking so we have moved towards equalism , but here my quastion is, does equalism defines only for this three things?? lets go to the things i feel should also come in equalism,  to start with my own small experiences, while travelling to other state with my own vehicle i was been stopped by the police officer & being asked why you are here in this state?? being astonished by his question my prompt reaction was, do i have to...

मेरी किताब में.....

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मेरी किताब में अब भी वो कहानी हे, मेरे देश में वो वीरता फिर जगानी  हे ....... वीर शिवाजी की वो हिन्दवी स्वराज की दहाड़ हे, वही अफ़ज़ल के करहाने की चीत्कार हे... मेरी किताब में.... कुछ शौर्य गाथाएं महाराणा की लड़ाई की हे, पर बाधाएं जयचंदो से गद्दार की हे.... मेरी किताब में.... सौम्यता की मूरत प्रभु महावीर हे, तो शौर्य के प्रतिक श्री कृष्ण हे, मेरी किताब में.... जहा लड़ी थी मर्दानी वो झांसी वाली रानी हे, वही हसते हुए फांसी चढ़ते भगत सिंह की कहानी हे, मेरी किताब में.... वही कहानी फिर सूना ने लाया हु, इस किताब के ज़रिये यह देश जगाने आया हु... बहुत थी देशप्रेम की ज्वाला जो अब फिर से जगानी हे, वही मेरे भारत की शान , विश्व वल्लभ में लहरानी हे... मेरी किताब में अब भी वो कहानी हे...

रोशनी की एक किरण

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छाई अंधेरी रात है, आज मौसम में कुछ अजीब बात है.... हो रही कुछ तो अनबन है, दिल में मची उलझन है... बहुत समय से एक डर सा लगा था, रिश्तों का दामन भर सा गया था... कहीं दूर कुछ किरणों की आहट है, फिर नई रोशनी की चाहत है.. यूं तो हर जगह अंधेरी रात है, पर किरणों की अपनी ही अलग बात है।। हर अंधेरा बीत जाएगा, रोशनी से भरा नया सवेरा लाएगा... कुछ अलग उसकी पहचान होगी, फिर उस सवेरे ओर दिन की अपनी ही शान होगी।।

उदासी का वो लम्हा..

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उदासी के एक कतरे से परेशान हो रहा था में, कई सारे गम है ये समझ रहा था में.... गम का माहौल इस कदर छाया था जीवन में, मानो अंदर ही अंदर बेहाल हो रहा था में.... न भूख थी , ना चैन था, अपने आप को झिंजोल रहा था में... पर अचानक एक आंधी सी आयी, कुछ नई सी बात लाई.... फिर कुछ सोचने को मजबुर कर गई, कुछ लम्हों की उदासी दूर कर गई... नई एक किरण आस कि दिल में भर गई, उदासी के वो लम्हे अपने साथ ले गई.... फिर एक सोच नई दे गई, क्या सच में मेरे जीवन में उदासी भर गई?????

What is our goal, become Human Being or Being Human?

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This time quite intellectual topic is there.. Sometimes we get confuse that what is the difference between a Human Being & Being Human? Some of my young friends asked few days earlier that Our Role Model Salman Khan is running an NGO named Being Human than why this name? Now this question creates this thread ahead... At common we all are Humans having a Brain which we can use to observe anything & can take decisions accordingly which is different in compare to Animals, who are also Living thing on the earth... But the main feature differs us from animals is Our Rational Mind which helps us to solve our problems. So now the question arises here that if humans are different because of rational mind than what is Being Human? Coming to the Being Human, by birth we all are human being but to come as being human can be only done by our did.... For e.g. I am going through a tough face of my life but using my rational mind & intelligence I solved my problem ...