क्युकी वो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी चला रहे हे।
कल तक जो प्यार जता रहे थे आज वो नफरत बता रहे हे, क्युकी अब वो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी चला रहे हें।। होता था संपर्क, करते थे रोज़ बात, होती थी मुलाकात, दिन हो या रात, अब वो हम से कतरा रहे हे, क्युकी अब वो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी चला रहे हे... बना रहे थे संगठन, सब को साथ ले चल रहे थे, कोई कुछ कहे संगठन के साथ रह रहे थे, आज वो सिर्फ अपने उत्पादनो का साथ दे रहे हें, क्युकी अब वो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी चला रहे हे... जब तक थे उनके उत्पादनों के साथ, बेचते रहे उन्हे अपने हाथ, तब तक हर जगह प्यार जता रहे थे, अपने साथ बता रहे थे, जैसे ही छुटा उत्पादनों का साथ, हमें उपेक्षा जता रहें हें, क्युकी अब वो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी चला रहे हे... संगठन मे था मशहूर, जिस आंगन का नाम, वहा के फुल कम हुए जा रहे हें, अपने स्वार्थ को संगठन का नाम दिये जा रहे हें, क्युकी अब वो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी चला रहे हे... कुछ तो बदला हे नाम कल ओर आज में, स्वार्थ की वजह से नेंतृत्व का समाज में, फिर भी हम उसे चला रहे हें, अपना उन्हे बना रहे हें, क्युकी अब वो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी चला रहे हे...