उदासी का वो लम्हा..
उदासी के एक कतरे से परेशान हो रहा था में, कई सारे गम है ये समझ रहा था में.... गम का माहौल इस कदर छाया था जीवन में, मानो अंदर ही अंदर बेहाल हो रहा था में.... न भूख थी , ना चैन था, अपने आप को झिंजोल रहा था में... पर अचानक एक आंधी सी आयी, कुछ नई सी बात लाई.... फिर कुछ सोचने को मजबुर कर गई, कुछ लम्हों की उदासी दूर कर गई... नई एक किरण आस कि दिल में भर गई, उदासी के वो लम्हे अपने साथ ले गई.... फिर एक सोच नई दे गई, क्या सच में मेरे जीवन में उदासी भर गई?????