ड्रग्स और भविष्य


आज कुछ दिनों बाद फिर कुछ लिखने की इच्छा हुई तो फिर से आप सब के समक्ष कुछ विचार प्रस्तुत करना चाहता हु, जो की आज कल युवाओ में एक दूषण बन चूका हे और पूर्ण सत्य जानने के बाद भी युवा उसका सेवन करते हे। ... 


में बात कर रहा हु समाज के सबसे बड़े विरोधी और स्वस्थ हानिकारक पदार्थ ड्रग के बारे में 


वर्तमान में जाने माने अभिनेता शाहरुख़ खान के पुत्र आर्यन खान की ड्रग्स के मामले में गिरफ्तारी होने के बाद फिर से यह विषय सुर्खियों में हे, परन्तु हम सब जानते हे की यह कोई आज कल की समस्या न होते हुए वर्षों से चली आ रही गंभीर समस्या हे... यह कोई नयी बात नहीं हे की युवा इन हानिकारक पदार्थो का सेवन करते हे, और पिछले कुछ वर्षो में इसका प्रमाण जानकारी के उपरान्त भी बढ़ता गया हे और आज यह समाज के स्थानिक इलाको में आसानी से प्राप्त हो रहा हे.

इस विषय में बहोत बार चर्चाए हुई, कुछ दिन इसके विरोध में अभियान चले पर फिर वापस इस विषय पे पर्दा दाल दिया जाता हे और कोई बड़ी हस्ती के पास पाए जाने पे यह विषय वापस चर्चा में आ जाता हे,

पर ऐसा क्यों की जब कोई हस्ती के पास हो तभी उस की चर्चा हो? , क्या समाज के सामान्य युवा इसका शिकार नहीं हो रहे? उन युवाओ तक इसे पहुंचाने वाले कोण?

ऐसे कई प्रश्न अनुत्तर हे, और यह ड्रग्स का कारोबार आसानी से चल रहा हे. आज का युवा इसके सभी सत्य जान ने के उपरान्त भी सिर्फ और सिर्फ फैशन और एक दूसरे के सामने खुद को सर्वोपरि पुरवार करने इसका सेवन कर रहा हे... आज सभी पार्टी या सेलिब्रेशन में ड्रग लेना गर्व की बात बना दी गयी हे, तो क्या ये प्रश्न उद्भव नहीं होता की ये परम्परा भारत जैसे आर्य देश में अपने आप आयी हे या लायी गयी हे?

ये सब कितने सालो से चल रहा हे परन्तु आर्यन खान के गिरफ्तारी के बाद ही इतना बड़ा सवाल क्यों बना? क्या इतने सालो से यह समस्या नहीं थी? और अगर थी तो वो बहार क्यों नहीं आयी? इसे क्यों दबाया गया या परदे में रखा गया? जो पदार्थ हमारी आने वाली पीढ़ी के रक्त में ज़हर भर देगी ये सत्य सब को पता होने के बावजूद भी इस समस्या को गंभीर रूप से क्युँ  नहीं लिया गया.... 

आज देश की सिर्फ गिनी चुनी सामजिक संस्थाए इस विषय पे ध्यान दे उसके निराकरण के लिए प्रयत्नशील हे , परन्तु क्या यह समस्या धीरे धीरे समाज के आखिरी हिस्से तक पहुंच रही हे ऐसा नहीं लग रहा? क्या हम इसका हमारे दरवाजे तक आने का इंतजार कर रहे हे? जो समस्या पिछले कुछ सालो तक अमरीका, लंडन या ऑस्ट्रेलिया की समस्या थी वह आज महापुरुषों और वीरों की भूमि ऐसे भारत देश में इतनी गंभीर कैसे हो गयी? कहीं यह देश के भविष्य को बिगाड़ने का कोई षड्यंत्र तो नहीं?

इतने साल इस समस्या के सत्य देखने के बाद क्या यह सही समय हे की हम सबने इसे सामजिक, राजनैतिक और सबसे ज़्यादा व्यक्तिगत स्तर पे जागरूकता से बहार लाना और हमारे युवाओ से इसे दूर ले जाना होगा, जो की देश के हर नागरिक की सामाजिक जवाबदारी होनी चाहिए, नहीं तो यह हमारे देश के युवाओ को अपने व्यक्तिगत स्तर से कही पीछे गर्ता  में धकेल देगी और हमारे घर तक आने में अधिक समय नहीं लगेगा। 


अगर आप मेरे विचार से सहमत हे तो अपनी प्रतिक्रिया कमेंट या लाइक से ज़रूर दे.  

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