देश मेरा अभी लड़ रहा, फिर नया यूं बन रहा


देश मेरा अभी लड़ रहा, फिर नया यूं बन रहा।।

आयी कुछ विपदा ऐसी,
जो देश मेरा जला रही,
पर चटटानो सी मजबुत इमारत,
वो अभी न हिला सकी.....

लग गई बन्दिशे,
खो गया कारवां,
हो गया कुछ ऐसा,
थम गया ये देश मेरा.....

पर हर जन मे हे विश्वास,
कुछ करने की सब दिल मे हे आस,
फिर वही किलकारी गूंजेगी,
कर रहा हर इन्सान यही प्रयास...

सब मिलेंगे साथ साथ,
करेंगे एक नया ध्येय,
लेके सबका साथ ओर विश्वास,
लिखेंगे हम सुवर्ण अध्याय.....

देश मेरा अभी लड़ रहा, फिर नया यूं बन रहा।।।

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