राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) - १


आज जीवन में आये एक अनुभव व् उस पे मेरी प्रतिक्रिया का एक वाकिया आप के सामने रखने जा रहा हु..

कुछ साल पहले मिड डे  जैसे बड़े वर्तमान पत्र में संघ के बारे में कुछ विषय रखा गया था जो वास्तविकता से बहोत ही अलग था. उसी बारे में मेरे कुछ विचार रखने की कोशिश एक वृत्तपत्र के माध्यम से की थी जिसके कुछ अंश अलग भागो में रखने का प्रयत्न कर रहा हु. 

मिड डे से अगर शुरू करे तो प्रथम वाक्य ही कुछ अर्थ विघटन किया हुआ लगा, लिखा हे की.....

राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ की स्थापना १९२५ में गांधीजी एवं कांग्रेस की कल्पना के भारत का विरोध करने की गई थी... 
पर जहां तक मैंने संघ की शाखा में सूना हे या किताबो में पढ़ा हे उसमे संघ की स्थापना भारत की आर्य संस्कृति एवं भारतीय प्राचीन जीवनशैली के विचारो की रक्षा करने के लिए की गई थी. जब की संघ के प्रथम पूजनीय सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी स्वयं कांग्रेस के कमिटी के सदस्य रहे थे. परन्तु भारत को इंडिया बनते देख राष्ट्र की प्राचीन संस्कृति की रक्षा हेतु दूरंदेशी विचार कर, एक बिनराजनैतिक संगठन की आवश्यकता को देख, उस वक़्त के सबसे बड़े राजनैतिक दल कांग्रेस को छोड़ संघ की स्थापना की. 

संघ को गांधीजी की कल्पना का भारत स्वीकार्य ना हो वो व्याजबी हे पर संघ ने अपनी कल्पना का भारत की रुपरेखा कभी सामने राखी ही नहीं हे... 
वास्तविकता इस बात से बिलकुल अलग हे जैसेकि समय समय पे संघ के अनेक अधिकारी गण ने संघ की कल्पना सामने रखी हे... उदहारण के रूप में एक संघ गीत रखना चाहूंगा जिसमे संघ के कल्पना का भारत व् रुपरेखा स्पष्ट रूप से जताई गई हे.. 

संगठन गढे चलो, सुपंथ पर बढे चलो,

भला हो जिसमे देश का वो काम सब किये चलो,

भूल कर भी मुख में जाती पंथ की न बात हो,

भाषा प्रान्त के लिए कभी न रक्तपात हो...

जैसे की समय समय पे बताया गया हे की संघ का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण का हे. और उसकी रूपरेखा में स्पष्ट हे की एक ऐसा संगठन बनाना हे जो देश के लिए भला कार्य सदैव करता रहे एवं कभी जाती पंथ की बात न करते सिर्फ और सिर्फ राष्ट्रहित की ही बात करे. अपने स्वार्थ को न देखते हुए सिर्फ राष्ट्र सर्वोपरि हे इस भावना को लोगो के मन में जगाना ही संघ का कार्य हे.. भारत का नौजवान आज के समय में पश्चिमी संस्कृति अपना रहा हे जिस वजह से भारत की पारंपारिक विचार लुप्त होते नज़र आ रहे हे, जब की एक समय में भारत विश्व के शिखर पे बिराजमान था... 

कुछ इस तरह भारत की श्रेष्ठता को वापस लाने की दिशा में बढ़ने जा रहा हे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ... 

ऐसे ही कुछ और मिथ्या और मेरे विचार वापस ले कर आऊंगा दूसरे लेख में... 


                  !! भारत माता की जय !!





Comments

  1. ये लेख बहुत ही अच्छा लिखा गया है। अभ्यासपूर्ण है। इसे मै आप के नाम के साथ आगे भेजना चाहता हूं। ताकी इसे सारे स्वयंसेवक पढे।
    मैं आपकी अनुमती लेना चाहता हूं, की मैं इसे आगे भेज सकूं।

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    1. बिल्कुल भेजिए, संघ के बारे मे सही जानकारी सभी तक पहुचनी ही चाहिये।।

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    2. Too good...acchi jankari mili..aabhar.

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