Lamha


क्या थी वो कमी जो यू ही ख़तम हो गया सब,
एक लम्हा ही था वो जो ले गया सब...

हमने अपनी जान लगा दी उस लम्हे पर,
लेकिन वो लम्हा ही बीत गया हमे छोड़ कर...

हो गए फिर एक बार वक़्त से पीछे,
आ गए कुछ लम्हों के नीचे...

पर फिर भी इस ज़िन्दगी में आज भी जोश है,
कुछ ओर करने का आज भी होश है...

ना हार मानी है ना मानूंगा(२)
अपनी जिंदगी कल भी में बनाता था और आज भी उसका भीष्म में ही बनूंगा...

ये लम्हे मेरा क्या बिगाड़ लेंगे,
मुझसे कल कुछ वक़्त फिर उधार लेंगे..

हर वक़्त का में लम्हा बनूंगा,
हर लम्हे का वक़्त से तब हिसाब लूंगा।।।

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